11 साल का शेर: जलती वैन में कूदकर 8 मासूमों को बचाने वाले ओमप्रकाश यादव I

लखनऊ
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ ज़िले से निकली यह कहानी सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि अदम्य साहस, मानवता और निडरता की अमर मिसाल है।
साल 2010 में महज़ 11 साल की उम्र में ओमप्रकाश यादव ने ऐसा काम कर दिखाया, जिसे बड़े-बड़े लोग भी करने से घबरा जाएँ।
एक दिन स्कूल जाते समय स्कूल वैन में अचानक गैस लीकेज हो गया और देखते ही देखते वैन में भयानक आग लग गई। घबराहट में वैन का ड्राइवर बच्चों को छोड़कर भाग खड़ा हुआ। वैन के अंदर फँसे मासूम बच्चे चीख-पुकार कर रहे थे, चारों तरफ़ आग और धुआँ फैल चुका था।
उस समय ओमप्रकाश भी वैन में ही था।
लेकिन डर के आगे झुकने के बजाय उसने जान की परवाह किए बिना जलती हुई वैन में बार-बार छलांग लगाई और एक-एक कर सभी 8 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला।
इस दौरान उसका चेहरा और दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए, लेकिन उसकी आँखों में सिर्फ एक ही मकसद था — “सबको बचाना है।”
ओमप्रकाश यादव की इस असाधारण वीरता ने पूरे देश का ध्यान खींचा।
उनके साहस को देखते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने उन्हें राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।
इसके अलावा:
प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रशंसा पत्र,
कई राष्ट्रीय व सामाजिक संस्थाओं द्वारा सम्मान और मेडल,मीडिया और समाज में “बहादुर बालक” के रूप में पहचान I
इतनी छोटी उम्र में अपने जीवन को दाँव पर लगाकर दूसरों की जान बचाना आसान नहीं होता।
ओमप्रकाश यादव ने यह साबित कर दिया कि वीरता उम्र नहीं देखती, बल्कि दिल में बसती है।
उनका साहस आज भी बच्चों, युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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