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स्कूल का अपना भवन नहीं, सफाई कर्मी के घर में पाठशाला

बाल दिवस आज: बस्तर में बच्चों की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में प्रशासन भी जहां फेल, वहां समाज का एक चेहरा ऐसा भी….

कोंडागांव

जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर ग्राम घोड़ागांव के डोंडेपारा में चार क्यों से प्राथमिक शाला किसी सरकारी भवन में नहीं, बल्कि एक सफाईकर्मी के घर में चल रही है। सफाईकर्मी ने घर दे दिया, खुद जमीन पर सो रहा है। प्राथमिक शाला में कक्षा पहली से पांचवीं तक कुल 15 बच्चे पढ़ते हैं।

स्कूल के पास सब कुछ है शिक्षक, किताबें, ब्लैक बोर्ड। बच्चों में फिर भी उत्साह नहीं तो बजह है बस एक स्कूल भवन। सिस्टम की बेरुखी देखकर स्कूल के सफाईकर्मी

बसंत बघेल ने अपना दो कमरों का छोटा कच्चा मकान बच्चों की पड़ई के लिए दे दिया। पलंग पर किताबें और श्यामपट रखा है। बसंत खुद जमीन पर सोता है, ताकि बच्चे पढ़ सकें। बसंत बवेल का कहना है कि मैं भी इसी गांव का हूं। जब कहीं से सुनवाई नहीं हुई, तो मैंने अपना आंगन और कमरा बच्चों को दे दिया। मुझे 3400 रुपए मानदेव मिलता है, लेकिन पैसे से बढ़कर बच्चों की पढ़ाई है, उनके लिए मेरा घर हमेशा खुला रहेगा। शिक्षिकार नंदा धुर्वा बताती हैं में दो साल से यहां हूं और यह स्थिति चार साल से चल रही है।

ग्रामीण बोले- देव तुल्य हैं

गांव के ग्रामीण उमेश बघेल, नंदूराम, हरीश और समलू कहते हैं जो काम विभाग ने नहीं किया, वह बसंत ने कर दिखाया। जिसने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपना घर दे दिया जिसमें स्कूल चला रहा है।

विभाग का वही पुराना जवाब

इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान ने कहा हमने रिपोर्ट भेज दी है, स्कूल भवन जर्जर है। नया भवन स्वीकृति के लिए प्रस्तावित है। यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं।

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